आमिर खान ने कहा- ‘ थ्री इडियट्स’ सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं थी


नई दिल्ली | 

अभिनेता आमिर खान के इस बयान पर शुक्रवार को बहस छिड़ गई कि ‘3 इडियट्स’ फ़िल्म में उनका किरदार ‘फुंसुख वांगड़ू’ सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था। उनके इस बयान की राजद, कांग्रेस और आप जैसी पार्टियों ने आलोचना की। दलों ने कहा कि सत्ताधारी खेमे के डर से अभिनेता कोई रुख नहीं अपनाना चाहते।

आमिर ने लंदन भारतीय फिल्म महोत्सव में एक सवाल के जवाब में कहा कि जब 2009 में ‘3 इडियट्स’ बनाई गई थी, तब वह, निर्देशक राजकुमार हिरानी और लेखक अभिजात जोशी सोनम वांगचुक को नहीं जानते थे। उन्होंने कहा, ‘वास्तव में यह एक गलत धारणा है। जब हम फिल्म ‘3 इडियट्स’ बना रहे थे, उस समय मुझे सोनम वांगचुक के बारे में जानकारी नहीं थी। मैं आपको बताना चाहता हूं कि न तो राजू (राजकुमार हिरानी) और न ही फिल्म के लेखक अभिजात, और न ही मुझे वांगचुक के बारे में पता था। हम उन्हें नहीं जानते थे। हालांकि, सोनम जो काम कर रहे हैं, वह अच्छा काम है। उनका सम्मान करने और उनके काम की सराहना करने के लिए ‘3 इडियट्स’ के किरदार का जिक्र करना जरूरी नहीं।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित गड़बड़ियों को लेकर वांगचुक की भूख हड़ताल के बारे में पूछे जाने पर खान ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम सभी उनकी सेहत को लेकर बहुत चिंतित हैं। हमें उम्मीद है कि इसका नतीजा अच्छा होगा। हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वह अनशन खत्म करेंगे और अपनी सेहत का ध्यान रखेंगे।’

खान का बयान सोशल मीडिया पर आते ही राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कई सवाल उठाए। झा ने कहा, 'उन्हें यह कहने में कितने साल लग गए? अब तक सभी जानते थे कि (वांगचुक के जीवन से ‘3 इडियट्स’ के एक किरदार को प्रेरणा मिली थी)। यह दिखाता है कि सत्तासीन लोगों के सामने अपनी रीढ़ सीधी रखना आसान नहीं है।'

झा ने वांगचुक के अनशन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है, क्योंकि ‘ऐसी सत्ता के सामने अनशन करने का कोई फायदा नहीं है, जिसमें संवेदना की कमी हो।’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य हुसैन दलवई ने सवाल किया कि खान इतने डरे हुए क्यों हैं। उन्होंने कहा कि खान को ‘बिना डर के बोलने का तरीका अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से सीखना चाहिए। कम से कम वांगचुक के प्रति सहानुभूति तो दिखानी चाहिए। दलवई ने कहा, ‘मुझे नहीं पता था कि वे इतने डरे हुए हैं। आमिर खान मेरे पसंदीदा अभिनेताओं और निर्माताओं में से एक हैं, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि वे इतने डरे हुए क्यों हैं। सोनम वांगचुक इतने दिन से भूख हड़ताल पर हैं। उन्हें उनके प्रति सहानुभूति जतानी चाहिए और उनका समर्थन करना चाहिए।'

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भी अभिनेता की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘चाहे आमिर खान हों या कोई और, मोदी सरकार ने सबका असली चरित्र उजागर कर दिया है। सबने इनके सामने घुटने टेक दिए हैं। उनमें बोलने का साहस नहीं है।’

अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वांगचुक को लेकर पूछे गए सवाल पर खान की प्रतिक्रिया से लगता है कि वे अब ‘3 इडियट्स’ और कई अन्य क्रांतिकारी फिल्में बनाने वाले व्यक्ति की केवल फीकी छाया भर रह गए हैं। उन्होंने लिखा, ‘आखिरकार आमिर खान से सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर सवाल पूछा गया। उनका जवाब विनम्र जरूर था, लेकिन बेहद फीका था। अब वह ‘3 इडियट्स’, कई अन्य क्रांतिकारी फिल्में और ‘सत्यमेव जयते’ कार्यक्रम बनाने वाले व्यक्ति की केवल फीकी छाया बनकर रह गए हैं।’

कांग्रेस के पूर्व नेता संजय झा ने भी 62 वर्षीय अभिनेता खान की टिप्पणी पर तंज कसा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘अब आमिर खान कह रहे हैं कि ‘3 इडियट्स’ का फुनसुख वांगडू सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं है। बिल्कुल सही। ठीक वैसे ही जैसे 1982 में बनी फिल्म ‘गांधी’ महात्मा गांधी पर आधारित नहीं है।’ उन्होंने यह टिप्पणी ब्रिटिश फिल्मकार रिचर्ड एटनबरो की एक फिल्म के संदर्भ में की, जिसमें बेन किंग्सले ने महात्मा गांधी की भूमिका निभाई थी।

खान की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने उन पर वांगचुक से दूरी बनाने का आरोप लगाया। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, ‘इस व्यक्ति ने एक पल में सारा सम्मान खो दिया। कायर।’ एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, ‘सोनम वांगचुक पर सवाल पूछे जाने पर आमिर खान ने गोलमोल और टालमटोल वाला जवाब दिया। पर्दे पर नायक बनने वाले लोग असल जिंदगी में कितने रीढ़ विहीन होते हैं!’ एक अन्य पोस्ट में कहा गया, ‘आमिर खान बेहद बेशर्म इंसान हैं। मुझे समझ नहीं आता कि लोग आखिर ऐसे लोगों के प्रशंसक कैसे हो सकते हैं।’

हालांकि, कुछ लोगों ने अभिनेता का समर्थन भी किया और कहा कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि ‘3 इडियट्स’ का फुनसुख वांगडू का किरदार सीधे तौर पर सोनम वांगचुक पर आधारित था। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, ‘सालों तक देश के सामने एक सुनियोजित छवि पेश की गई कि सोनम वांगचुक ‘3 इडियट्स’ के वास्तविक जीवन के रैंचो हैं—लद्दाख का एक गरीब लड़का, जिसने शून्य से शुरुआत की, व्यवस्था को ठुकराया और आम लोगों के लिए संघर्ष करने वाला एक क्रांतिकार बना जबकि वास्तविकता यह है कि वांगचुक का जन्म एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार में हुआ था।’

सोशल मीडिया पर कुछ अन्य लोगों ने भी आमिर खान के स्पष्टीकरण का समर्थन किया। उन्होंने राजकुमार हिरानी के एक पुराने साक्षात्कार का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि रैंचो का किरदार भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के एक छात्र से प्रेरित था, जिसने अपने एक मित्र के नाम पर संस्थान में दाखिला लिया था क्योंकि मित्र का दाखिला नहीं हो सका था।

वीडियो में हिरानी ने कहा था, ‘लेकिन उसके दोस्त के पिता ने उसे संस्थान में दाखिला लेने की अनुमति नहीं दी। इसलिए वह अपने दोस्त के स्थान पर संस्थान में पढ़ाई करने लगा। तीन साल बाद उसका भेद खुल गया और उसे डिग्री देने से इनकार कर दिया गया।' हिरानी के अनुसार तब उसने कहा, ‘मैं यहां डिग्री लेने नहीं, बल्कि शिक्षा हासिल करने आया हूं।”

इसी बीच, वर्ष 2018 में सोनम वांगचुक के एक सार्वजनिक बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वांगचुक ने 2008 में मुंबई में आयोजित सीएनएन-आईबीएन रियल हीरोज अवॉर्ड्स के दौरान आमिर खान से मुलाकात का जिक्र किया था। वांगचुक के अनुसार, उस दौरान उन्होंने आमिर खान से सियाचिन पर फिल्म बनाने के विचार पर चर्चा की थी और खान की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में उनके काम पर आधारित एक वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया था।

वांगचुक ने बताया था कि दिसंबर 2009 में उनके मित्रों और कुछ पत्रकारों ने उन्हें बताया कि उन पर एक फिल्म बनाई गई है और उसमें उनके स्कूल को भी दिखाया गया है। वांगचुक ने कहा था कि जब उन्होंने अपने स्कूल में इस बारे में जानकारी ली तो पता चला कि फिल्म की टीम के कुछ सदस्य वहां आए थे, लेकिन उन्हें शूटिंग की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि वे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का इस्तेमाल करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद फिल्म की शूटिंग पास के एक अन्य स्कूल में की गई।

वांगचुक नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल होने के बाद से 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।



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