सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य-एल1 मिशन लॉन्च
@ सुनो सुनो नेटवर्क |
नई दिल्ली | सूर्य के अध्ययन के लिए भारत ने आदित्य-एल1 मिशन लॉन्च कर दिया। अंतरिक्ष यान शनिवार को श्रीहरिकोटा से भारतीय समयानुसार सुबह 11:50 बजे अंतरिक्ष में रवाना हुआ। श्रीहरिकोटा देश का प्रमुख उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र है। यह चेन्नई से 100 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के एक सप्ताह बाद भारत ने आदित्य-एल1 मिशन लॉन्च किया है। हालांकि, सूर्य का अध्ययन करने वाला यह पहला मिशन नहीं है। इससे पहले नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने भी इसी मकसद से सूर्य मिशन भेजे हैं।
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भारत का यह पहला सूर्य मिशन है। इससे अंतरिक्ष में एक ऑब्जर्वेटरी स्थापित की जाएगी। ऑब्जर्वेटरी पृथ्वी के सबसे नजदीक सूर्य की निगरानी करेगी। सोलर विंड जैसे अंतरिक्ष के मौसम की विशेषताओं का अध्ययन करेगी।यह अंतरिक्ष यान असल में सूर्य के पास नहीं जाएगा। जहां आदित्य एल1 को पहुंचना है, उसकी दूरी पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर है। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी की चार गुना है। लेकिन सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का बहुत मामूली, लगभग 1 प्रतिशत ही है।
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मिशन में जिस एल1 का नाम दिया जा रहा है, वह लैगरेंज प्वाइंट है। यह अंतरिक्ष में एक ऐसी जगह है, जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित होता है। यहां एक किस्म का न्यूट्रल प्वाइंट विकसित हो जाता है, जहां अंतरिक्ष यान के ईंधन की सबसे कम खपत होती है। इस जगह का नाम फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ लुईस लैगरेंज के नाम पर रखा गया है। लैंगरेज ने इस बिंदु के बारे में 18वीं सदी में खोज की थी।
अपने विशेष स्थान से ऑब्जर्वेटरी के चार उपकरण सीधे सूर्य पर नजर रखेंगे। बाकी तीन उपकरण लैगरेंज प्वाइंट के आसपास क्षेत्रों और कणों का अध्ययन करेंगे, जो हमें अंतरग्रहीय अंतरिक्ष में सौर हलचलों के बारे में अधिक जानकारी देंगे। इसरो को उम्मीद है कि यह मिशन कुछ ऐसी अहम जानकारियां देगा, जिससे सूर्य के बारे में हमारी समझदारी बेहतर होगी। जैसे- कोराना हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, सोलर फ्लेयर और इन सबकी विशिष्टताएं।
भारत सरकार ने 2019 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। तब इसकी लागत 4.6 करोड़ डॉलर के करीब थी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कुल खर्च की विस्तृत जानकारी अभी जारी नहीं की है।
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