एड. प्रदीप खांबलकर .... खदान परिसर से न्यायपालिका तक का सफर
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| एड. प्रदीप खांबलकर। |
@ गुलाब आय छवारे
खदानों से कोयला, मैंगनीज, तांबा, सोना, चांदी, हीरा जैसे खनिज निकलते हैं। ये खनिज देश की समृद्धि में अहम भूमिका निभाते हैं। कई खदानें गांवों, जंगलों और पहाड़ों से घिरी होती हैं। इन क्षेत्रों में खनन कंपनी के कर्मचारियों के छोटे-छोटे क्वार्टर होते हैं। इन्हीं क्वार्टरों में रहकर, सीमित साधनों के साथ पढ़-लिखकर कुछ बच्चे और युवा बड़ी मंजिल हासिल करते हैं। नागपुर की सावनेर तहसील के खापरखेड़ा में डब्ल्यूसीएल की खदान है। कोयले की यह खदान परिसर प्रतिभा से संपन्न रही है। इनमें से एक हैं- एड. प्रदीप ज्ञानेश्वर खांबलकर।
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डब्ल्यूसीएल की चनकापुर कॉलोनी में प्रदीप का जन्म 2 सितंबर 1982 को हुआ था। प्रदीप का बचपन इसी चनकापुर कॉलोनी और सिल्लेवाड़ा परिसर में बीता। उन्होंने जिला परिषद शाला में प्रारंभिक पढ़ाई की। उसके बाद राष्ट्रसंत तुकड़ो जी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत विभिन्न महाविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण की। खापरखेड़ा से रोज नागपुर आना-जाना करते थे। प्रदीप को खेलकूद में रुचि रही। नियमित व्यायाम और दौड़ उनकी जीवनशैली रही है। इसलिए वे किसी फौजी की तरह हमेशा फिट रहे।
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प्रदीप ने नागपुर विश्वविद्यालय से बीकॉम, एमकॉम, एमए (अर्थशास्त्र), एमए (लोक प्रशासन), बीएमसी, बीएड एवं एलएलबी की परीक्षाएं पास कीं। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छोटे से गांव के प्रदीप आज एड. प्रदीप खांबलकर के रूप में जाने जाते हैं। वे साल 2009 से तहसील, जिला कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक कानून की प्रैक्टिस कर रहे हैं। सिविल और आपराधिक दोनों तरह के मुकदमे लड़ते हैं।
एड. खांबलकर साल 2001 से पत्रकारिता में भी सक्रिय हैं। ग्रामीण पत्रकारिता में उन्होंने अहम स्थान हासिल किया है। वे रागिनी फाउंडेशन के संस्थापक हैं। इसके जरिए जनजागृति के कार्य करते हैं। वंचितों की मदद के लिए आगे रहते हैं। एड. खांबलकर राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि, प्राथमिकता हमेशा सामाजिक न्याय ही रही है। इसके लिए वे निस्वार्थ रूप से अग्रसर हैं।
मित्र परिवार की ओर से एड. प्रदीप ज्ञानेश्वर खांबलकर को जन्मदिन की असीम शुभकामनाएं....
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