ओडिशा : ट्रेन हादसे में अब तक 290 लोगों की मौत, 1000 घायल
सुनो सुनो नेटवर्क |
बालासोर | ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में अब तक 290 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि करीब 1000 लोग घायल हैं। इनमें से कई गंभीर हैं। यह हादसा कोरोमंडल एक्सप्रेस के एक मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मारने के कारण हुआ। कोरोमंडल एक्सप्रेस के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए। इनमें से कुछ डिब्बे दूसरी पटरी पर चले गए। वे बेंगलुरु से आ रही यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस से टकरा गए। इससे यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के भी तीन डिब्बे पटरी से उतर गए। इस तरह यह भीषण हादसा हुआ।
हादसा साउथ इस्टर्न जोन के खड़गपुर डिविजन में हुआ। बताया गया है कि शालीमार से शालीमार-मद्रास कोरोमंडल एक्सप्रेस निर्धारित समय पर निकली। ट्रेन में 23 डिब्बे थे। ट्रेन को अप लाइन पर बालासोर, कटक, भुवनेश्वर, विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा होते हुए चेन्नई पहुंचना था। ट्रेन ने दोपहर 3:20 बजे यात्रा शुरू की। पहले संतरागाछी रेलवे स्टेशन पर रुकी। फिर खड़गपुर स्टेशन पहुंची। शाम 7 बजे बालासोर के पास बाहानगा बाजार रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी।
ट्रेन को बाहानगा में रुके बिना सीधा आगे जाना था। लेकिन यह स्टेशन पर मेन लाइन की बजाय लूप लाइन की तरफ चली गई। लूप लाइन पर मालगाड़ी खड़ी थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस ने मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। इससे कोरोमंडल एक्सप्रेस के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए। इसके कुछ डिब्बे दूसरी तरफ डाउन लाइन तक पहुंचकर यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस से टकरा गए। यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस में 22 डिब्बे थे। यह ट्रेन करीब 4 घंटे की देरी से चल रही थी। इसके भी 3 डिब्बे पटरी से उतर गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई ट्रेन किसी ट्रैक पर खड़ी हो तो दूसरी ट्रेन को वहां आने से रोकने के लिए पॉइंट रिवर्स कर दिए जाते हैं। अगर पॉइंट रिवर्स न हो सके तो फौरन रेड लाइट सिग्नल कर दिया जाता है ताकि जो भी ट्रेन आ रही हो वह वहीं रुक जाए। इस रूट पर ट्रेनों की गति करीब 15 दिन पहले बढ़ाकर अधिकतम 130 किमी प्रति घंटा की गई थी। हादसे के वक्त कोरोमंडल एक्सप्रेस की गति करीब 128 किमी प्रति घंटे की थी। जबकि दूसरी ट्रेन भी करीब 125 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही थी। इसलिए नुकसान ज्यादा हुआ।
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