औष्णिक विद्युत प्रकल्प : रामटेक के युवाओं का रोजगार क्यों मारा जा रहा?
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| प्रतीकात्मक चित्र। |
@ उमेश यादव |
रामटेक कब तक पर्यटन स्थल के नाम पर छला जाएगा? रामटेक परिसर में पर्यटन की आड़ में बेतहाशा होटल खुल गए। इनमें से कुछ आपत्तिजनक स्थिति के लिए बदनाम हैं। रामटेक परिसर में मैंगनीज उत्पादक कंपनी मॉयल लिमिटेड के अलावा कोई बड़ा सरकारी रोजगार केंद्र नहीं है। इक्का-दुक्का कृषि आधारित निजी कारखाने, मिल खुले हैं। ये मेहनत ज्यादा और मजदूरी कम के सूत्र पर चलते हैं। साल 2021 में उम्मीद बंधी थी कि रामटेक में औष्णिक विद्युत प्रकल्प (थर्मल पावर प्लांट) शुरू होगा। इससे रामटेक और पारशिवनी के युवाओं को रोजगार मिलेगा। अब सपना टूटता दिख रहा है। क्या रामटेक को किसी की सियासी नजर लग गई है?
दिसंबर 2021 में उद्योग, ऊर्जा एवं कामगार विभाग की तत्कालीन अवर सचिव श्रद्धा कोचरेकर ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत निर्मिती कंपनी के अध्यक्ष व प्रबंध संचालक को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि रामटेक में थर्मल पावर प्लांट की संभावनाओं की तलाश कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट भेजें। इसी तरह का पत्र तत्कालीन विशेष कार्यकारी अधिकारी एस. खरात ने भी विद्युत कंपनी को लिखा था। खरात ने भी उक्त प्रोजेक्ट को लेकर वाणिज्यिक, तकनीकी व पर्यावरण स्थिति पर अपनी रिपोर्ट देने को कहा था।
जानकारों का कहना है कि रामटेक के पटगोवारी (हेटीटोला) में थर्मल पावर प्लांट आसानी से स्थापित किया जा सकता है। इस संबंध में पंचायत समिति, रामटेक के पूर्व उपसभापति उदयसिंह उर्फ गज्जू यादव ने नागपुर जिले के तत्कालीन पालकमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री डॉ. नितिन राउत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले को निवेदन-पत्र सौंपा था। पत्र में कहा गया था कि पटगोवारी की जमीन मुरमाड़ी और लाल मिट्टी की है। यह खेती के लिए उपयोगी नहीं है। ऐसे में पटगोवारी की जमीन थर्मल पावर प्लांट के लिए उपयुक्त होगी। पटगोवारी में थर्मल पावर प्लांट बनने से रामटेक, पारशिवनी और देवलापार परिसर के युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।
पत्र में यह भी कहा गया था कि पटगोवारी में जमीन, कोयला और पानी जैसे आवश्यक संसाधन पर्याप्त मात्रा में है। यहां की जमीन निजी स्वरूप की है। प्रोजेक्ट के लिए वन जमीन या आदिवासी जमीन की कोई दिक्कत नहीं है। कोयले की मुख्य खदानें गोंडेगांव, इंदर, कामठी खुली खदान, सिंगोरी, भानेगांव अत्यंत पास में है। पास ही रेलवे मार्ग है। नए रेल मार्ग की जरूरत नहीं है। यहां राष्ट्रीय महामार्ग भी है। इससे सड़क मार्ग से भी कोयले की आपूर्ति की जा सकती है। विशेष यह कि पानी के लिए पेंच नदी, नवेगांव खैरी बांध, तोतलाडोह बांध भी उपलब्ध हैं।
तत्कालीन ऊर्जा मंत्री डॉ. नितिन राउत ने पत्र पर गंभीरता से ध्यान दिया। राज्य सरकार के निर्देश पर फरवरी 2022 में महानिर्मिती कंपनी, कोराडी के अधिकारियों की टीम पटगोवारी पहुंची। टीम का नेतृत्व उपमुख्य अभियंता एसआर गारजलवार कर रहे थे। टीम ने प्रकल्प के लिए उचित और व्यावहारिक जमीन का सर्वे किया। पानी व रेल व्यवस्था, परिवहन सेवा का आकलन किया। अधिकारियों के साथ पटगोवारी की सरपंच सविता चिंचुलकर, पंचायत समिति, रामटेक के पूर्व उपसभापति उदयसिंह उर्फ गज्जू यादव सहित कई लोग थे। पटगोवारी में 2x 660 मेगावॉट विद्युत प्रकल्प लगाने के लिए यह सर्वे किया गया था। सर्वे के बाद अधिकारी सकारात्मक दिखे।
मुख्य अभियंता (स्थापत्य) -2, कोराडी ने 11 मार्च 2023 को मुख्य अभियंता (प्रकल्प एवं नियोजन), महानिर्मिती, मुंबई को सकारात्मक रिपोर्ट सौंपी। इसमें साफ कहा गया था कि पटगोवारी में प्रकल्प की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। पटगोवारी में उपलब्ध जमीन के 7/12 एवं नक्शे के मुताबिक प्रकल्प के लिए 600 हेक्टर आर निजी जमीन उपलब्ध है। ग्राम पंचायत के ठहराव के अनुसार ग्रामीण इस प्रकल्प के लिए जमीन देने को तैयार हैं। गूगल अर्थ के अनुसार प्रकल्प के लिए कोयले, पानी एवं रेलमार्ग की पर्याप्त उपलब्धता है। रिपोर्ट की प्रति प्रकल्प निर्माण से संबंधित अन्य सहविभागों को भी भेजी गई थी। इसके बावजूद रामटेक के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया गया। क्यों? समझ से परे है।
अब करीब सवा साल बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चौकाने वाला पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि कोराडी में प्रस्तावित 2x660 मेगावाट ताप बिजली प्रोजेक्ट को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करें। गडकरी ने एनजीओ 'विदर्भ कनेक्ट' का पत्र में उल्लेख किया है। गडकरी ने सलाह दी कि बिजली प्रोजेक्ट पारशिवनी में स्थापित किया जा सकता है। एनजीओ के अनुसार प्रस्तावित प्रोजेक्ट से नागपुर शहर क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ेगा। इसलिए इस प्रस्तावित 2x660 मेगावाट थर्मल पावर प्रोजेक्ट को रद्द या अन्य जगह स्थानांतरित करना चाहिए।
गडकरी के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस में इस प्रोजेक्ट के लिए तकरार बढ़ गई। विधायक विकास ठाकरे की अगुआई में कांग्रेस ने प्रोजेक्ट का विरोध किया। पर्यावरण संबंधी जनसुनवाई में ठाकरे ने तर्क दिया कि यह प्रोजेक्ट नागपुरवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। कोराडी थर्मल पावर प्लांट के प्रदूषण के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। शहर का पानी दूषित हो रहा है। जबकि महादुला नगर पंचायत के अध्यक्ष राजेश रंगारी सहित अन्य लोगों ने कोराडी में प्रोजेक्ट का समर्थन किया।
रामटेक के पटगोवारी में पावर प्रोजेक्ट के लिए गज्जू यादव ढाई साल से प्रयास कर रहे थे। रामटेक विधानसभा क्षेत्र के कई युवाओं ने इस प्रोजेक्ट में काम करने का सपना देखा था। अब वे ठगा महसूस कर रहे हैं। इधर, साफ हो चुका है कि कोराडी में जरूरत से ज्यादा पावर प्रोजेक्ट यूनिट लगाना मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इस खतरे की जद में नागपुर शहर भी आ चुका है। सवाल है कि समय और आम जनता की मांग का समर्थन करते हुए पटगोवारी में पावर प्लांट क्यों नहीं लगाया जा रहा है? हम पारशिवनी में प्रोजेक्ट शुरू करने का विरोध नहीं करते। लेकिन रामटेक की जनता के प्रयासों की अनदेखी नहीं की जाना चाहिए।
(लेखक 'सुनो सुनो' के संपादक हैं।)


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