कांग्रेस में उठी आवाज- रामटेक से शिवसेना नहीं, कांग्रेस का उम्मीदवार लड़ाओ

@ उमेश यादव |

सत्ता की लालसा ने भाजपा और शिवसेना को एक दूसरे से अलग किया। सत्ता की लालसा में शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा एकसाथ आए। सत्ता की लालसा में शिवसेना टूटी। पहले धड़े के सर्वेसर्वा सत्ताविहीन हो गए। दूसरे धड़े ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। महाराष्ट्र की राजनीति में जनता ने इस उठापठक, टूट-फूट, जोड़-तोड़ को खूब देखा। आगे भी कहीं अधिक देखना बाकी है। जिसके पास ज्यादा सीटें वही बलवान। इसलिए सत्ता छिनने के बावजूद महाविकास आघाड़ी कायम तो है। लेकिन दल-बल में बदलाव हो गया। लिहाजा आगे के चुनावी समीकरण भी उसी तरह बनेंगे। इसकी आहट, सुगबुगाहट और आवाज कांग्रेस में सुनाई देने लगी है। इस बदलाव का असर रामटेक लोकसभा सीट के लिए दिखने लगा है। लोकसभा चुनाव 2024 का जायजा लेने के लिए 2 जून को मुंबई स्थित तिलक भवन में हुई बैठक में यह खुलकर दिखा।

स्थानीय कांग्रेस नेता मानते हैं कि नागपुर जिले में पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। वातावरण कांग्रेस के अनुकूल है। इसलिए कांग्रेस को रामटेक लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार लड़ाना चाहिए। बैठक में नागपुर जिले के नेताओं ने कहा कि पहले नागपुर और रामटेक दोनों लोकसभा सीटें कांग्रेस का गढ़ थीं। इसलिए अब दोनों जगह कांग्रेस को अपना उम्मीदवार लड़ाना चाहिए। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले, विधानसभा में पार्टी के नेता बालासाहब थोरात, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, विदर्भ प्रभारी आशीष दुआ ने स्थानीय नेताओं की राय जानी। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष नाना गावंडे भी उपस्थित थे। नागपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक विकास ठाकरे ने कहा कि नाना पटोले नागपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। लोकसभा चुनाव के बाद शहर की दो विधानसभा सीटें कांग्रेस ने जीतीं। दो सीटें थोड़े अंतर से हारीं। 

बैठक में रामटेक विधानसभा के नेता उदयसिंह उर्फ गज्जू यादव ने भी विचार व्यक्त किए। वे रामटेक विधानसभा क्षेत्र की ओर से प्रदेश प्रतिनिधि के रूप में बैठक में शामिल हुए थे। गज्जू यादव ने कहा कि रामटेक लोकसभा सीट राकांपा या शिवसेना (यूबीटी) के लिए नहीं छोड़ी जाए। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रखनेवाली इस सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार ही खड़ा करना चाहिए। यही बात किशोर गजभिये, एसक्यू जमा, सुरेश भोयर, नरेश बर्वे ने भी कही। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि जिले में मूल रूप से शिवसेना का अस्तित्व नहीं के बराबर है। सांसद कृपाल तुमाने भाजपा के भरोसे जीते थे। वहीं, जिले में कांग्रेस की स्थिति मजबूत हो रही है। जिला परिषद, पंचायत समिति और बाजार समितियों के चुनावों में कांग्रेस जीती है। इसलिए रामटेक लोकसभा सीट से महाविकास आघाड़ी का उम्मीदवार कांग्रेस का होना चाहिए। कांग्रेस को नागपुर और रामटेक लोकसभा सीटों के लिए सर्वेक्षण कराना चाहिए। मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों का चयन हो। 

इधर, गज्जू यादव ने यह भी कहा कि जो लोग निस्वार्थ भाव से वर्षों से पार्टी में हैं, संगठन को आगे बढ़ा रहे हैं, उन्हें ही लोकसभा सीट की उम्मीदवारी दी जाए। सत्ता के जरिए मलाई खाने वालों को दूर रखा जाए। लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस से पहली पसंद पूर्व मंत्री एवं विधायक नितिन राऊत, महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल राऊत, पूर्व जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष तक्षशिला वाघधरे, राहुल घरडे, नरेश बर्वे आदि नामों पर विचार किया जाए। इन नामों पर विधायक राजू पारवे, उदयसिंह उर्फ गज्जू यादव, मुजीब पठान , बाबा आष्टनकर, राजा तिडके, नाना कंभाले, अरुण हटवार, अशोक वासनिक, रामप्रसाद पराते, निकेश भोयर, शिवकुमार यादव, राजेश यादव, शकूर नागाणी, शाहजहां सेठ, अहफाज अहमद आदि नेतागण एकमत हो सकते हैं।

बहरहाल, नागपुर जिला कांग्रेस में लोकसभा सीट के लिए जो आवाज उठी है, वह लगता नहीं कि आगे भी चुप होगी। भविष्य में रामटेक विधानसभा सीट के लिए भी यह आवाज उठ सकती है। पिछली बार इस सीट से शिवसेना नेता आशीष जैस्वाल निर्दलीय चुनाव लड़े थे। जीते भी थे। शिवसेना को यह सीट भाजपा के लिए छोड़नी पड़ी थी। लेकिन शिवसेना के लोग जैस्वाल का प्रचार करते रहे। लिहाजा, भाजपा उम्मीदवार डीएम रेड्डी चुनाव हार गए थे। वहीं, हमेशा की तरह कांग्रेसी नेताओं ने जैसवाल की मदद की। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार उदयसिंह उर्फ गज्जू यादव ने तीसरे स्थान पर रहकर अहम छाप छोड़ी थी। 

अब आशीष जैस्वाल शिवसेना (बीएस) यानी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के नेता हैं। शुरुआत में इस गुट को भारी समर्थन मिलता दिख रहा था। अब स्थिति डांवाडोल है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) कोई अन्य उम्मीदवार रामटेक से खड़ा करेगी। वहीं, शिवसेना (बीएस) में भी अंदरूनी असंतोष दिखने लगा है। इसका कारण भाजपा का रवैया माना जाता है। ऐसे में मौजूदा विधायक के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। यहां भी स्थानीय कांग्रेस नेता अपना उम्मीदवार लाने का प्रयास करेंगे।

(लेखक 'सुनो सुनो' के संपादक हैं।)

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