नागपुर : आरएसएस का 'संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष' आरंभ, 25 दिन चलेगी कक्षा
@ सुनो सुनो रिपोर्ट |
नागपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का 25 दिवसीय 'संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष' सोमवार से शुरू हो गया। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से 682 स्वयंसेवक शामिल हुए हैं। रेशिमबाग स्थित हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में यह कार्यक्रम चल रहा है। समापन 1 जून को होगा।
संघ के सह सरकार्यवाह व वर्ग के पालक अधिकारी रामदत्त ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कष्ट में भी आनंद की अनुभूति को साधना कहते हैं। संघ शिक्षा वर्ग यह साधना है। इस अवसर पर सह सरकार्यवाह मुकुंद एवं अवध प्रांत संघचालक कृष्ण मोहन भी उपस्थित थे।
दीप प्रज्ज्वलन तथा भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण करने के बाद रामदत्त ने कहा कि जिस प्रकार किसान अपने खेतों में बीज का रोपण करता है, उसी प्रकार संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवकों के भीतर संस्कारों का बीजारोपण होता है। इसीलिए संघ कार्य में प्रशिक्षण का महत्व है। रेशिमबाग की यह पवित्र भूमि डॉ. हेडगेवार तथा श्री गुरुजी की तपोस्थली है। यहां आने वाले हर स्वयंसेवक को देश प्रथम, 'स्व' के प्रति गौरव, प्रामाणिकता, देश भक्ति, अनुशासन और स्नेह का भाव विकसित करने का अवसर प्राप्त होता है।
रामदत्त ने कहा कि वर्ग में सम्मिलित स्वयंसेवकों को अन्य प्रांतों से आए न्यूनतम दो स्वयंसेवकों से गहन परिचय करना चाहिए। वे प्रांतों की समस्याओं की जानकारी भी प्राप्त करें। सह सरकार्यवाह ने कहा कि स्वयंसेवकों को समाज के प्रश्नों की केवल चर्चा करने वाला नहीं, अपितु समाधान ढूंढने वाला बनना चाहिए।
उन्होंने आह्वान किया कि संघ शिक्षा वर्ग में रहते हुए संघ के स्वभाव को भी समझना पड़ेगा। संघ मत में निजी मत को विलीन करना सीखना होगा। यही संगठन का गुण है। स्वयंसेवकों को समाज में कार्य करते समय अग्रसर होकर कार्य करने वाला बनना होगा। शीघ्र ही संघ स्थापना को सौ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। संघ शिक्षा वर्ग में सम्मिलित होने वाले स्वयंसेवकों को इस बात का विचार करना होगा कि आने वाले दिनों में कार्य विस्तार को लेकर हमारी भूमिका क्या होगी? इस दृष्टि से विचार करना होगा। संघ और समाज के विचार एकरूप होने तक प्रयासरत रहना होगा।



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