दक्षिण भारत भाजपा मुक्त, कर्नाटक में कांग्रेस की दमदार जीत

चित्र कांग्रेस के टि्वटर एकाउंट से।

@ सुनो सुनो रिपोर्ट |

बेंगलुरु | कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनाएगी। विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। कर्नाटक विधानसभा में 224 सीटें हैं। इनमें से कांग्रेस ने 136, भाजपा ने 65, जेडीएस ने 19 और अन्य ने 4 सीटें जीती हैं। भाजपा के लिए यह करारी हार है। कर्नाटक दक्षिण भारत का एकमात्र राज्य था, जहां भाजपा की सत्ता थी।

इस जीत से कांग्रेस नेताओं की खुशी और भावुकता का ठिकाना ही नहीं रहा। कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार घर की बालकनी पर आए। कांग्रेस का झंडा फहराया। कार्यकर्ताओं के सामने हाथ जोड़े। मीडिया के बीच पहुंचे तो भावुक हो उठे। कहा, 'जेल में सोनिया गांधी मिलने आई थीं। उनसे मैंने जीत का वादा किया था। कांग्रेस नेताओं को श्रेय देता हूं, जिन्होंने इतनी मेहनत की।'

हार से भाजपा नेताओं में मायूसी थी। भाजपा ने हार मान ली। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई सामने आए। उन्होंने कहा, 'नतीजों की समीक्षा करेंगे। भाजपा लोकसभा चुनाव में दमदार वापसी करेगी।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को जीत की बधाई दी। समर्थन करने वालों का आभार माना।

दिल्ली में राहुल गांधी मीडिया के सामने आए। छह बार मीडिया से नमस्ते कहा। दो मिनट का वक्त मांगा। फिर बोले- हमने नफरत से लड़ाई नहीं लड़ी। कर्नाटक ने दिखा दिया कि देश को मोहब्बत पसंद है। हमारे जो मुख्य पांच वादे थे, वे पहली ही कैबिनेट बैठक में पूरे किए जाएंगे।

बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, 'भाजपा हमें ताना मारती थी कि हम कांग्रेस मुक्त भारत बनाएंगे। अब यह सच्चाई है कि भाजपा दक्षिण भारत मुक्त हो चुकी है। राज्य की जनता ने फैसला किया। हमें 136 सीटें मिलीं। 36 साल बाद हमारी बड़ी जीत हुई है।'

चित्र कांग्रेस के टि्वटर एकाउंट से।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, 'यह कर्नाटक के स्वाभिमान की जीत है। मैं पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देता हूं। कर्नाटक ने इतिहास रच दिया। देश को रोशनी दिखाई है। तहे दिल से देश के लाखों-लाख कार्यकर्ताओं और कर्नाटक की साढ़े छह करोड़ जनता का धन्यवाद।'

इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े चेहरों का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा था। कांग्रेस के सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, भाजपा के बसवराज बोम्मई प्रमुख चेहरा थे। ये तीनों चुनाव जीत गए। लेकिन बोम्मई और उनके 11 मंत्री जीते। जबकि 11 मंत्री हार गए। कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए भी यह बेहद अहम चुनाव था।  निश्चय ही एकतरफा जीत से पार्टी में उनका कद बढ़ेगा।

कर्नाटक विधानसभा की वोटिंग 10 मई को हुई थी। 224 सीटों के लिए 2,615 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। करीब 5.13 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले। चुनाव आयोग के मुताबिक, कर्नाटक में 73.19% मतदान हुआ। यह 1957 के बाद राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा है।

राज्य में 38 साल से सत्ता नहीं बदली थी। आखिरी बार 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व वाली जनता पार्टी ने सत्ता में रहते हुए चुनाव जीता था। वहीं, पिछले पांच चुनाव (1999, 2004, 2008, 2013 और 2018) में से सिर्फ दो बार (1999, 2013) किसी एक पार्टी को बहुमत मिला। भाजपा 2004, 2008, 2018 में सबसे बड़ी पार्टी बनी। उसने बाहरी समर्थन से सरकार बनाई। 

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