जयंती पर विशेष : देश-विदेश से 50,000 फीट रील जमा की, तब बनी महात्मा गांधी पर पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म

डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'महात्मा गांधी : ट्वेंटीथ सेंचुरी प्रोफेट' से... 

@ उमेश यादव |

आज 2 अक्टूबर को स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी की जयंती है। कम लोग ही जानते होंगे कि गांधीजी पर पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'महात्मा गांधी : ट्वेंटीथ सेंचुरी प्रोफेट' है। इसे तमिल लेखक, पत्रकार और फिल्मकार एके चेटि्टयार ने बनाया था। चेटि्टयार ने डॉक्यूमेंट्री का काम 1937 में शुरू किया था। सबसे पहले उन्होंने एक कंपनी बनाई, जिसका नाम द डॉक्यूमेंट्री फिल्मस लिमिटेड था। कंपनी का कार्यालय चेन्नई में था। 

महात्मा गांधी पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए चेटि्टयार ने देश के कई स्थानों के साथ ही ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की। उन्होंने 3 साल में इन स्थानों से 50,000 फीट रील (फुटेज) जमा किए। कुछ फुटेज चेट्टियार ने खुद लिए थे। एडिटिंग के बाद फिल्म 12,000 फीट की रह गई। पहले डॉक्यूमेंट्री में दी गई आवाज तमिल में थी। बाद में इसे तेलुगु में डब किया गया। वर्तमान में उपलब्ध फिल्म की अवधि 45 मिनट है।

पहली बार डॉक्यूमेंट्री 23 अगस्त 1940 को  चेन्नई के पुरासवालकम स्थित राक्सी थिएटर में दिखाई गई। तब देश-विदेश के अखबारों ने डॉक्यूमेंट्री के बारे में विस्तार से लिखा था। कवरेज देने वाले विदेशी अखबारों में न्यूयॉर्क टाइम्स भी शामिल था। कुछ दिनों की स्क्रीनिंग के बाद डॉक्यूमेंट्री थिएटर से हटानी पड़ी, क्योंकि इसके प्रदर्शन के लिए सरकार से अनुमति नहीं ली गई थी।  

आजादी के बाद 1947 में डॉक्यूमेंट्री को हिंदी में डब किया गया। इसी साल तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आधिकारिक तौर पर डॉक्यूमेट्री रिलीज की। चेटि्टयार ने इस डॉक्यूमेंट्री को बनाने का अनुभव अपनी तमिल मैगजीन 'कुमारी मलार' में लिखा। साल 1943 में प्रकाशित इन लेखों का संग्रह 'अन्नल अडिचुवत्तील' (महात्मा के कदमों के नाम) पुस्तक के रूप में छपा।

साल 1947 के बाद यह समझा गया कि डॉक्यूमेंट्री गुम हो गई। इसके बाद 2006 में डॉक्यूमेंट्री का संक्षिप्त रूप सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी में मिला। साल 1998 में बना यह संस्करण अंग्रेजी में डब था। यह इतिहासकार एआर व्यंकटचलापति के प्रयासों से मिला था। इसके बाद एक कॉपी यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया में मिली। हालांकि, मूल कॉपी आज तक नहीं मिली है। अन्य भाषाओं के संस्करण भी नहीं मिले।

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