आवरण कथा : महाराष्ट्र में कमलाबाई, पेंगुइन सेना से लेकर केकड़ा तक की राजनीति जारी

उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)

@ उमेश यादव

कटाक्ष के बिना राजनीति अधूरी है। राजनीति में 'बयानवीरों' का अस्तित्व कभी खत्म नहीं हो सकता। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भाजपा के बीच लगातार कड़वाहट बढ़ रही है। दोनों दल लगातार एक दूसरे पर जुबानी हमले कर रहे हैं। भाजपा को शिवसेना ‘कमलाबाई’ कह रही है और उद्धव की शिवसेना को भाजपा 'पेंगुइन सेना'। 

भाजपा का चुनाव चिह्न ‘कमल’ है। इसलिए उद्धव की शिवसेना ने ‘कमलाबाई’ शब्द गढ़ा है। जबकि उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे की मुंबई में पेंगुइन लाने की महत्वाकांक्षी योजना थी। इसलिए भाजपा उद्धव की शिवसेना को ‘पेंगुइन सेना’ कह रही है। दरअसल, 2016 में दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल से मुंबई के भायखला चिड़ियाघर में 8 हबोल्डट पेंगुइन लाए गए थे। बस इसी को आधार मानकर उद्धव की शिवसेना पर भाजपा तंज कस रही है।

उद्धव का खेमा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट पर भी तीखे हमले कर रहा है। वह शिंदे गुट के विधायकों (बागियों) को गद्दार करार दे रहा है। उन पर ‘50 खोखा’ (एक करोड़ रुपए ) कहकर तंज कस रहा है। उद्धव खेमे का आरोप है कि बागी विधायकों ने 50 करोड़ रुपए के बदले में अपनी निष्ठा बदली। यही नहीं, आदित्य ठाकरे ने पिछले महीने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत को ‘केकड़ा’ भी कह दिया था।

विश्लेषकों का मानना है कि यह जुबानी जंग सबसे अमीर निकाय बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएससी) चुनाव से पहले और तेज होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष यह चुनाव जीतने की पूरी कोशिश करेंगे। इन तंज की सियासत की बुनियाद उस वक्त पड़ी थी, जब शिंदे गुट के 39 अन्य विधायकों के बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार 29 जून को गिर गई थी। अगले दिन शिंदे ने मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। तब से उद्धव की शिवसेना और भाजपा में बैर तेज हो गया।

पिछले महीने शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में भाजपा के लिए ‘कमलाबाई’ शब्द का इस्तेमाल किया। सूत्रों का कहना है कि इसके जवाब में मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार ने ‘सामना’ के संपादक उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर पूछा कि क्या उनके खेमे को ‘पेंगुइन सेना’ कहा जाए। इसके बावजूद उद्धव की शिवसेना ने भाजपा के लिए ‘कमलाबाई’ शब्द का इस्तेमाल जारी रखा। जवाब में भाजपा ने भी उद्धव की शिवसेना को ‘पेंगुइन सेना’ कहना शुरू किया।

यह जानना जरूरी है कि पहले 'कमलाबाई' शब्द का इस्तेमाल शिवसेना के संस्थापक बालासाहब ठाकरे निजी बातचीत में करते थे। बाद में इस शब्द का इस्तेमाल ‘सामना’ में किया गया। भले ही दोनों दल हिंदुत्व के मुद्दे पर एक हों। लेकिन बालासाहब ठाकरे का कभी भाजपा के प्रति बहुत लगाव नहीं था। जानकारों के मुताबिक बालासाहब ठाकरे ने पहली बार 'कमलाबाई' शब्द का इस्तेमाल 1985 में किया था।

वर्ष 1984 में शिवसेना और भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया था। लेकिन अन्य विपक्षी दलों की तरह इन दोनों दलों का भी सफाया हो गया। वर्ष 1985 में भाजपा ने प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिव फ्रंट (पीडीएफ) से हाथ मिला लिया। तब बालसाहब ठाकरे ने रैली में कहा था कि कमलाबाई हमें छोड़कर चली गई।

वहीं, ‘पेंगुइन सेना’ आदित्य ठाकरे पर सीधा कटाक्ष है। आदित्य ने मुंबई के प्राणि उद्यान में पेंगुइन लाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस चिड़ियाघर का प्रबंधन बीएमसी करता है। पेंगुइन लाने और उनके रखरखाव पर भारी खर्च को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने योजना की आलोचना की थी।

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