देश : कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव का शंखनाद, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री क्यों कह रहे कठपुतली नहीं चलेगी?

पृथ्वीराज चव्हाण (फाइल फोटो)
@ उमेश यादव |

अब यह महसूस होने लगा है कि केंद्र की सत्ता में कांग्रेस की वापसी बिना किसी क्रांति के संभव नहीं है। इस क्रांति की चिंगारी कांग्रेस के भीतर से ही निकलनी चाहिए। कांग्रेस में नेहरू-गांधी परिवार के लोग अब भी सक्रिय हैं। पार्टी एक बड़ा वर्ग इस परिवार पर अब भी आस्था रखता है। लेकिन कांग्रेस समर्थकों की संख्या घटती जा रही है। बीते चुनाव के नतीजे यह स्थिति स्पष्ट करती है। कुल मिलाकर कांग्रेस एक ऐसे नेतृत्व के संकट से जूझ रही, जिसे न निकला जा सकता है और न ही उगला। इन हालातों के बीच कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चुनाव का कार्यक्रम कर दिया गया है। 

सोनिया गांधी, राहुल गांधी (फाइल फोटो)।
चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 24 सितंबर से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया आरंभ होगी। इसकी आखिरी तिथि 30 सितंबर है। नामांकन पत्रों की जांच 1 अक्टूबर को होगी। जबकि नामांकन पत्र 8 अक्टूबर तक वापस लिए जा सकेंगे। एक से अधिक उम्मीदवार होने पर 17 अक्टूबर को चुनाव होगा। मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे तक होगा। 19 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।  वहीं, 9000 से अधिक प्रतिनिधि (डेलीगेट्स) मतदान कर सकेंगे।

मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की ऑनलाइन बैठक में कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण की ओर से पेश चुनाव कार्यक्रम को मंजूरी दी गई। सीडब्ल्यूसी की बैठक करीब 30 मिनट चली। पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने बताया कि चुनाव कार्यक्रम को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण ने चुनाव कार्यक्रम तैयार किया था, जिसे कार्य समिति ने मंजूरी दी।

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सीडब्ल्यूसी की ऑनलाइन बैठक सोनिया गांधी की अध्यक्षता में शुरू हुई, जो चिकित्सा जांच के लिए विदेश में हैं। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी सोनिया के साथ मौजूद रहे। बैठक में आनंद शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री, केसी वेणुगोपाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, मुकुल वासनिक और पी. चिदंबरम के अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उपस्थित रहे। जयराम रमेश ने कहा, ‘हमारे देश में कांग्रेस एकमात्र राजनीतिक दल है, जहां इस तरह से चुनाव होता है। पार्टी में हर स्तर पर और खासकर अध्यक्ष के स्तर पर चुनाव हुए हैं और होंगे।’

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यह सब चल ही रहा था कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘जी 23’ के सदस्य पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि पार्टी को बचाने के लिए अब कदम उठाने होंगे। अगर किसी को ‘कठपुतली अध्यक्ष' बनाकर ‘बैकसीट ड्राइविंग' (पीछे से चलाने) की कोशिश हुई, तो कांग्रेस नहीं बच पाएगी। चव्हाण ने कहा, ‘कांग्रेस के संविधान के मुताबिक पार्टी के सभी पदों पर चुनाव होना चाहिए। कांग्रेस कार्य समिति और अन्य पदों के चुनाव होते थे। सीताराम केसरी के समय यानी 24 साल पहले आखिरी बार संगठन के चुनाव हुए। अब सभी पदों पर अध्यक्ष द्वारा नामित लोग होते हैं। जो अध्यक्ष नामित करता है, उसके खिलाफ कोई बोलता नहीं है। निर्वाचित लोग अध्यक्ष को सही सलाह देते हैं। नामित लोग ऐसा नहीं करते। इसी वजह से पार्टी हारती है।’ चव्हाण का यह भी कहना है कि अगर राहुल गांधी अध्यक्ष नहीं बनना चाह रहे हैं तो फिर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। 

दरअसल गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और 21 अन्य कांग्रेस नेताओं ने अगस्त, 2020 में बैठक कर सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने पार्टी को फिर से मजबूत करने के लिए कई मांगें की थीं, जिनमें संगठन के चुनाव कराने और सक्रिय नेतृत्व की मांग प्रमुख थीं। इन्हीं नेताओं के समूह को ‘जी 23’ कहा जाता है। ‘जी 23’ के पत्र को कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती के रूप में देखा गया। इस समूह के कई नेता जैसे गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़ चुके हैं। वहीं वीरप्पा मोइली जैसे कुछ नेताओं ने इस समूह से खुद को अलग कर लिया है।

चव्हाण के ताजा बयान के कुछ कारण माने जा सकते हैं। उनमें से एक है- कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत और कुछ अन्य नेताओं के नामों की चर्चा। चव्हाण ने सवाल भी किया है कि क्या चुनाव से पहले नाम तय हो जाएगा? क्या तब चुनाव तारीख बताई जाएगी? चव्हाण ने कहा, ‘चुनाव की तारीख तय कीजिए, जिसे पर्चा भरना है, वह सामने आएगा। उल्टी प्रक्रिया क्यों खड़ी कर रहे हैं? पहले से नाम सुनिश्चित करेंगे और फिर चुनाव कराएंगे। ऐसा कभी होता है क्या? चुनाव कराइए, जिसे लड़ना होगा, वह लड़ेगा।’ 

अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए पृथ्वीराज चव्हाण के रूप में यह आवाज महाराष्ट्र से उठी है। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इन 75 साल में महाराष्ट्र से कांग्रेस का एक भी अध्यक्ष नहीं बना। केवल नागपुर जिले की रामटेक सीट से सांसद रहे पीवी नरसिंह राव कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे। राव 1992 से 1994 तक इस पद पर रहे। इसी पद पर रहते हुए वे देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके थे। हालांकि, राव मूलत: आंध्रप्रदेश के थे। वे आंध प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे थे। उन्होंने नागपुर में उच्च शिक्षा हासिल की थी। उनकी यही उपलब्धि उन्हें रामटेक से लोकसभा चुनाव का टिकट देने में अहम रही। कुछ मिलाकर कभी कोई मराठी व्यक्ति  कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं माना। 

उधर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कह रहे हैं, 'मुझे हाई कमान जो कहता है मैं वह करता हूं। मेरी पार्टी ने जब भी, जो भी हुक्म दिया है, मैंने एक अनुशासित सिपाही की तरह उसे पूरा किया है.' गहलोत ने दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की थी। इस मुलाकात के बाद मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सोनिया गांधी ने उनसे कांग्रेस का अध्यक्ष पद स्वीकार करने के लिए कहा है। 

गहलोत के लिए न सोनिया गांधी के आदेश पर इनकार करना आसान है और न ही राजस्थान का मुख्यमंत्री पद छोड़ना। राजस्थान कांग्रेस इस समय गुटबाजी का शिकार है। सचिन पायलट ने बार-बार गहलोत के नेतृत्व को चुनौती दी है। माना जा रहा है कि हाईकमान कांग्रेस के दोनों धड़ों को खत्म करने के लिए ही यह कदम उठा रहा है। अगर गहलोत दिल्ली में अध्यक्ष बनते हैं तो पायलट को एक साल के लिए मुख्यमंत्री बनाकर गुटबाजी खत्म की जा सकेगी। दोनों धड़े मिलकर अगला विधानसभा चुनाव लड़ सकेंगे।

राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। तब से ही कांग्रेस अध्यक्ष का पद खाली है। सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष हैं। सीडब्ल्यूसी ने पिछले साल जिस कार्यक्रम को मंजूरी दी थी, उसके मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया 21 अगस्त से 20 सितंबर के बीच पूरी की जानी थी। हालांकि, ऐसा होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में महात्मा गांधी याद आ रहे हैं, जिन्होंने देश की आजादी के बाद कहा था कि कांग्रेस को भंग कर दिया जाना चाहिए। क्या बापू की बात आज के कांग्रेस के नेताओं को याद है? क्या कांग्रेस वालों को ही अपनी पूरी पार्टी भंग कर नई पार्टी नहीं बनाना चाहिए?

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