नागपुर : सिल्लेवाड़ा-बर्डी बस में भारी भीड़ : जान हथेली पर रख पढ़ने जा रहे छात्र, बसें बढ़ाने की मांग

@ प्रदीप खांबलकर |

नागपुर जिले की सावनेर तहसील का सिल्लेवाड़ा (खापरखेड़ा) बड़ा औद्योगिक परिसर है। यहां डब्ल्यूसीएल की बड़ी कोयला खदानें हैं। इस परिसर में डब्ल्यूसीएल के कर्मचारियों की कालोनियां हैं। सिल्लेवाड़ा गांव नागपुर शहर से करीब 30 किमी दूर है।  यहां से रोजाना कई लोग नौकरी, व्यवसाय आदि के लिए नागपुर जाते हैं। इसी तरह छात्र भी पढ़ाई के लिए नागपुर शहर के स्कूल-कॉलेजों में जाते हैं। इनके आवागमन के लिए सरकारी सुविधाएं न के बराबर है।

पहले नागपुर शहर से राज्य परिवहन महामंडल (निगम) की बस सिल्लेवाड़ा आती थी। इसी से सिल्लेवाड़ा के लोग नागपुर आवागमन करते थे। करीब 20 साल पहले यह बस बंद हो गई। उसके बाद स्थानीय लोग निजी साधनों से नागपुर जाने के लिए मजबूर हो गए। एक दूसरा विकल्प यह रहा कि सिल्लेवाड़ा के लोग खापरखेड़ा जाकर नागपुर शहर के लिए बस पकड़ते रहे। हालांकि, इसमें उन्हें असुविधा होती थी। स्थानीय लोगों ने आवाज उठाई तो दो साल पहले सिल्लवाड़ा से 'आपली बस सेवा' (शहर बस सेवा) शुरू हुई। हालांकि, इसके तहत केवल एक बस सिल्लेवाड़ा से सीधे मोरभवन (नागपुर) के लिए चलाई जा रही है।

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हाल यह है कि 'आपली बस सेवा' की एक ही बस सुबह आती है। इस बस में इतनी भीड़ हो जाती है कि स्कूल-कॉलेज के छात्रों को ठीक से जगह तक नहीं मिल पाती। वे खड़े होकर बस में सफर करते हैं। ज्यादातर छात्रों को बस के पायदान पर खड़े होकर सफर करना पड़ता है। ऐसे में यह यात्रा जोखिमभरी बन जाती है। इस बस में यात्रा करने वाले ज्यादातर विद्यार्थी पोटा व चनकापुर गांवों के रहने वाले हैं। छात्रों और पालकों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और 'आपली बस सेवा' के संबंधित विभाग को निवेदन देकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने  सिल्लेवाड़ा से मोरभवन  (नागपुर) के लिए सुबह 6:30 बजे दो बसें चलाने की मांग की। 

इस संबंध में स्थानीय रागिणी फाउंडेशन ने भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को सजग रहना चाहिए। ऐसी व्यवस्था की जाए कि छात्रों को 30 किमी का सफर जान हथेली पर लेकर न करना पड़े। रागिणी फाउंडेशन ने यह भी कहा कि सिल्लेवाड़ा, पोटा, चनकापुर, वलनी, रोहणा आदि कोयला खदान प्रकल्पग्रस्त गांव हैं। यहां के छात्रों के माता-पिता, दादा-नाना आदि ने डब्ल्यूसीएल की खदानों में अपना पूरा जीवन दे दिया। इसके बावजूद डब्ल्यूसीएल प्रशासन परिसर के छात्रों को मुफ्त बस सेवा नहीं उपलब्ध करा रहा है।

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