आवरण कथा : बिहार में प्रशांत किशोर क्यों कह रहे कि नीतीश कुमार को ‘फेविकॉल’ का ब्रांड एंबेसडर होना चाहिए

नीतीश कुमार, प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)।
@  उमेश यादव

राजनीतिक रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला जारी है। प्रशांत ने कहा कि नीतीश को ‘फेविकॉल’ का ब्रांड एंबेसडर होना चाहिए।

प्रशांत ‘जन सुराज अभियान’ के तहत पूर्णिया पहुंचे थे। उन्होंने मीडिया से कहा, ‘अगर फेविकॉल कंपनी वाले मुझसे मिलेंगे तो मैं उन्हें सलाह दूंगा कि वे नीतीश कुमार को अपना ब्रांड एंबेसडर बना लें। किसी की भी सरकार हो। लेकिन वे कुर्सी से चिपके हुए रहते हैं।’

दरअसल, पहले प्रशांत किशोर ने कहा था कि बिहार में राजनीतिक बदलाव का राष्ट्रीय राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं होगा। प्रशांत के बयान पर नीतीश ने जवाब दिया था। नीतीश ने कहा था कि प्रशांत किशोर के बयान से लोग यही समझेंगे कि उनका मन भाजपा के साथ रहने का है।

अब नीतीश की टिप्पणी पर प्रशांत ने पलटवार किया। प्रशांत ने कहा, ‘एक महीने पहले तक 90 डिग्री के कोण पर झुक कर वे (नीतीश) प्राणाम कर रहे थे। वे अगर किसी को भाजपा की बी टीम कह रहे हैं तो यह हास्यास्पद है। आप (नीतीश) खुद उनके साथ (भाजपा) थे। कल फिर से कहां जाएंगे कोई नहीं जानता।’

आईपैक के संस्थापक प्रशांत किशोर का इशारा नीतीश के इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह की ओर था। समारोह में नीतीश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नमस्कार करने के लिए 90 डिग्री के कोण पर झुक गए थे।

इधर, नीतीश के समर्थकों का एक वर्ग यह भी कह रहा है कि वे शीर्ष पद की लालसा में ‘जन सुराज अभियान’ चला रहे हैं। ऐसी बातों पर प्रशांत ने कहा, ‘मेरा मकसद मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनना नहीं है। सीएम या पीएम बनना होता तो किसी पार्टी से कुछ जोड़-तोड़ या समझौता करके भी बन सकता था। मेरा मकसद बिहार के अच्छे लोगों को राजनीति में लाने का है। मैं सत्ता नहीं व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघर्ष करने का प्रयास कर रहा हूं।

किशोर ने कहा, "मेरी पदयात्रा के एक महीने के भीतर सामूहिक रूप से यह तय होगा कि आगे राजनीतिक दल बनाना है या नहीं बनाना है। सभी लोग मिलकर आगे का रास्ता तय करेंगे। यह प्रकिया पूरे तौर पर लोकतांत्रिक एवं सामूहिक होगी। अगर कोई दल बनता है तो मैं उसका नेता या अध्यक्ष नहीं बनूंगा। पार्टी उन सभी की होगी, जो इस सोच से जुड़कर इसके निर्माण में संस्थापक बनेंगे।

प्रशांत ने कहा, ‘मैं अपने जीवनकाल में बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में देखना चाहता हूं। मैंने देश के कई राज्यों में काम किया है। बिहार उनके मुकाबले बहुत पीछे है। हम चाहते हैं कि 2034 तक बिहार विकास के सभी मापदंडों पर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। मैं अपनी पदयात्रा के बाद बिहार के समग्र विकास के लिए 10 सबसे महत्वपूर्ण विषय जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार आदि पर एक विस्तृत ब्लूप्रिंट जारी करूंगा। उसमें सिर्फ समस्या नहीं गिनाई जाएगी, बल्कि उसका ठोस समाधान भी बताया जाएगा।'

इससे पहले नीतीश ने प्रशांत पर तल्ख बयान दिया था। नीतीश ने कहा था कि 'उन्हें (प्रशांत किशोर) एबीसीडी भी पता है?' इस पर प्रशांत किशोर ने पलटवार किया था। प्रशांत ने कहा था, '17 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद आपको याद आया कि 10 लाख नौकरी दी जा सकती है। अगर आप इसे दे सकते हैं या इसे दे सकते थे तो अभी तक रुके क्यों हैं? पहले ही दे देना चाहिए था। लेकिन नीतीश कुमार इतने बड़े नेता हैं कि उन्हें 'ए' से लेकर 'जेड' तक आता है दूसरे को तो 'एबीसी' भी नहीं आता है।

प्रशांत ने कहा था, 'नीतीश ने कहा है कि 10 लाख नौकरी दे देंगे। तो हमने भी कहा कि 10 लाख नौकरी दे दीजिए। हम अभियान वापस ले लेंगे। उन्हें अपना नेता मान लेंगे। जैसे 2015 में उनका काम कर रहे थे, वैसे फिर से उनका काम करने लगेंगे। फिर से उनका झंडा लेकर घूमेंगे। 10 लाख लड़कों को नौकरी दे कर दिखाइए साल भर में। बारह महीने में से एक महीना निकल गया। दूसरा महीना चालू है। 12 महीने होने दीजिए। उसके बाद उनसे पूछेंगे कि किसे एबीसी का ज्ञान है और किसे 'एक्सवाईजेड' का ज्ञान है।

प्रशांत ने यह भी कहा था कि बिहार देश का सबसे गरीब और पिछड़ा राज्य है। सबसे ज्यादा पलायन इस राज्य से होता है। बिहार में 13 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। इनमें से आठ करोड़ लोग दिन का 100 रुपया भी नहीं कमाते हैं। 17 साल से नीतीश बाबू मुख्यमंत्री हैं। वे कह रहे हैं कि किसी को एबीसी का ज्ञान नहीं है, तो आप अपने ज्ञान से बता दीजिए कि 100 रुपए की आय वालों की आमदनी क्यों नहीं बढ़ रही है‌?

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