आवरण कथा : बारामती के बहाने बावनकुले के एक तीर से दो निशाने और 'छोटे पवार' के कौए का अभिशाप
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| नागपुर में मीडिया से बातचीत करते चंद्रशेखर बावनकुले। |
@ उमेश यादव
विधान परिषद सदस्य और पूर्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को महाराष्ट्र भाजपाध्यक्ष का पद संभाले एक महीने हो चुके हैं। इस बीच भाजपा ने लोकसभा चुनाव-2024 के लिए उन सीटों पर दम दिखाने की तैयारी शुरू कर दी है, जहां भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इसलिए बावनकुले ने प्रदेश भाजपाध्यक्ष का पद संभालने के बाद पहला बड़ा धावा राकांपा प्रमुख शरद पवार के गढ़ बारामती में बोला। बिल्कुल उसी तरह जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'मिशन मुंबई' की घोषणा की। वह भी मुंबई पहुंचकर।
बावनकुले ने भी 'मिशन बारामती' के तहत शरद पवार के गढ़ में दस्तक दी। इसी महीने के पहले हफ्ते में बावनकुले बारामती पहुंचे थे। उन्होंने कन्हेरी के हनुमान मंदिर में दर्शन किए। इसी मंदिर में शरद पवार का परिवार चुनाव प्रचार का नारियल फोड़ता रहा है। बावनकुले ने कहा कि 18 महीनों में केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारामन 5 से 6 बार बारामती आएंगी। हर बार तीन दिन यहां रुकेंगी। वे यहां विकास की स्थिति देखेंगी। बारामती के लोगों की केंद्र सरकार से अपेक्षा के बारे में जानेंगी। बावनकुले ने कहा कि अगले दो महीनों में वे राज्य के सभी जिलों का दौरा करेंगे। उन्होंने दावा किया कि आगे के सभी चुनावों में भाजपा जीतेगी।
बावनकुले के बयान के तीन दिन बाद राकांपा ने तीखा जवाब दिया। राकांपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा पर तंज कसा। पवार ने कहा, मराठी कहावत है- कौए के अभिशाप से गाय नहीं मरती। उन्होंने कहा कि यह सच है कि भाजपा के नए अध्यक्ष बारामती आते हैं तो काफी चर्चा होती है। इसकी वजह यह है कि वे यहां आते हैं तो उसकी खबर बनती है। कहीं और जाते हैं तो ऐसा नहीं होता। नए अध्यक्ष को शायद कुछ नया चाहिए। इसलिए वे बारामती आकर चर्चा पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कुछ अलग करना चाहिए।
खैर, इसी महीने के दूसरे हफ्ते में बावनकुले नाशिक में थे। वहां मीडिया से चर्चा के दौरान बावनकुले ने कहा, 'मैं हर तीन महीने में बारामती का दौरा करूंगा। वर्ष 2024 में बारामती में 'घड़ी' निश्चित रूप से रुक जाएगी। हमने अमेठी जीत ली है। अब हम बारामती जीत सकते हैं।' बावनकुले यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी कह दिया कि राकांपा प्रमुख ने अपने गृहनगर बारामती का विकास कर कोई एहसान नहीं किया। राकांपा प्रमुख का परिवार 40 साल से बारामती से चुनाव जीत रहा है। अपने निर्वाचन क्षेत्र का विकास करना हर नेता का कर्तव्य है।
दरअसल, बारामती लोकसभा क्षेत्र पुणे जिले में है। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले बारामती की सांसद हैं। वहीं बारामती विधानसभा सीट से शरद पवार के भतीजे अजित पवार विधायक हैं। शरद पवार खुद बारामती लोकसभा सीट से कई बार सांसद रहे हैं। वहीं, घड़ी राकांपा का चुनाव चिन्ह है।
नागपुर में शुक्रवार (16 सितंबर) को मीडिया के एक सवाल के जवाब में बावनकुले ने कहा कि उन्होंने राकांपा प्रमुख शरद पवार पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया। व्यक्तिगत आरोप लगाना हमारी संस्कृति नहीं है। हम काम के दम पर अपनी पार्टी को मजबूत बना रहे हैं। अजीत पवार के बयान पर उन्होंने कहा कि यह 2024 के चुनाव नतीजे बताएंगे कि बारामती में क्या होगा।
यह तो निश्चय है कि बारामती भाजपा के मिशन-2024 का अहम हिस्सा है। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बावनकुले इस मिशन के बहाने एक तीर से दो निशाने लगा रहे हैं। कारण- महाराष्ट्र में भाजपा की कड़ी टक्कर राकांपा से ही है। शिंदे गुट को अपने साथ लेकर भाजपा पहले ही उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ताकत कम कर चुकी है। बावनकुले जानते होंगे कि महाराष्ट्र की राजनीति के 'चाणक्य' शरद पवार पर टिप्पणी से पूरी राकांपा तिलमिलाएगी। इसलिए बावनकुले ने महाराष्ट्र में भाजपा की कमान संभालते ही पहला हमला बारामती में बोला। लेकिन क्या बावनकुले की राह आसान होगी? क्या वे बारामती के 'सेनापति' अजीत पवार के कटाक्षों से लड़ पाएंगे? क्या उनके पास 'कौए के अभिशाप से गाय की मौत' जैसे व्यंग्य है? क्या वे शरद पवार की रणनीति से पहले 'छोटे पवार' के तंजों से जीत सकेंगे?
और चलते चलते.... सुन रहे हैं कि चंद्रशेखर बावनकुले बारामती से अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। शुभकामनाएं।
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