आवरण कथा : डॉक्‍टरी की पढ़ाई करने चीन जा रहे, जरा संभलकर! भारत में 16% छात्र ही सफल

प्रतीकात्‍मक चित्र। 

@ उमेश यादव |

भारत में हर साल कई छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश  के लिए परीक्षा देते हैं। सफल छात्रों को देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिल जाता है। परीक्षा में विफल होने के कारण जिन्‍हें देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिलता, वे विदेश का रुख करते हैं। कई भारतीय छात्र चीन के मे‍डिकल कॉलेजों में प्रवेश लेना चाहते हैं। कई बिना पूरी जानकारी हासिल किए चीन के मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लेते हैं। बाद में उन्‍हें कई दिक्कतों  से गुजरना होता है। 

यह कहना उचित है कि अगर डॉक्‍टरी की पढ़ाई करने के लिए चीन जा रहे हैं तो जरा संभलकर। चीन से मेडिकल की  पढ़ाई कर लौटने वाले 16% छात्र ही भारत में सफल रहे हैं। इन हालातों को देखते हुए भारत ने चीन में मेडि‍कल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। इसमें उन्हें चीन में पढ़ाई करने के बाद होने वाली कई तरह की समस्याओं के प्रति आगाह किया गया है। एडवाइजारी में छात्रों को परीक्षा उत्तीर्ण होने के कम प्रतिशत, आधिकारिक भाषा पुतोंग्हुआ सीखने की बाध्यता और भारत में चिकित्सक के तौर पर प्रैक्टिस करने के कड़े नियमों के बारे में बताया गया है।

यह परामर्श ऐसे समय जारी किया गया है, जब चीन के चिकित्सा संस्थानों में पढ़ने वाले कई भारतीय छात्र चीन के कोविड वीसा प्रतिबंध के कारण दो साल से ज्यादा समय से घर बैठे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में विभिन्न चीनी विश्वविद्यालयों में 23 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों की है। कोविड वीसा प्रतिबंधों के दो साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद चीन ने हाल में कुछ चुनिंदा छात्रों को वापस आने के लिए वीसा जारी किया था। लेकिन उनमें से अधिकांश छात्र भारत लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि सीधी उड़ान उपलब्ध नहीं है। 

चीन में क्‍वारेंटाइन की पाबंदियों को देखते हुए दोनों देशों के बीच सीमित उड़ान सुविधाओं के लिए बातचीत जारी है। इस बीच, चीनी मेडिकल कॉलेजों ने भारत और विदेश से नए छात्रों का प्रवेश शुरू कर दिया है। इसलिए बीजिंग में भारतीय दूतावास ने उन छात्रों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जो चीन में मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं। एडवाइजरी में उन कठिनाइयों के बारे में बताया गया है, जो चीन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को झेलनी पड़ सकती हैं।

छात्रों को पढ़ाई के बाद भारत में डॉक्‍टरी की प्रैक्टिस करने के लिए जो योग्यता हासिल करनी पड़ती है, उसके कड़े नियमों की भी जानकारी दी गई है। एडवाइजरी में कहा गया है कि भारत में प्रैक्टिस के लिए 2015 से 2021 तक केवल 16% छात्र ही परीक्षा उत्तीर्ण कर सके। इस दौरान 40,417 छात्रों में से केवल 6,387 छात्रों ने ‘मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया’ (एमसीआई)  की विदेशी चिकित्सा स्नातक (एफएमजी) परीक्षा पास की।

एडवाइजरी में कहा गया है कि 2015 से 2021 तक  जिन भारतीय छात्रों ने चीन के 45 मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से क्लिनिकल मेडिकल पाठ्यक्रमों की पढ़ाई की, उनमें से केवल 16 प्रतिशत ही पास हो सके। जो  माता-पिता अपने बच्चों को चीनी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए भेजना चाहते हैं उन्हें इस तथ्य का संज्ञान लेना चाहिए।  हर विश्वविद्यालय की फीस अलग-अलग है। प्रवेश लेने से पहले उन्हें सीधे विश्वविद्यालय से संपर्क करना चाहिए।

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