जयंती पर विशेष संपादकीय : भगत सिंह नास्तिक थे, पर नास्तिकता को धर्म विशेष पर हमले का हथियार नहीं बनाया

भगत सिंह।

@ उमेश यादव|

भगत सिंह। नाम ही काफी है। कभी कहीं किसी क्रांतिकारी लेखक का कथन पढ़ा था कि भगत सिंह हमारी भावनाओं में तो हैं, लेकिन विचारों में नहीं। इस कथन ने मुझ पर गहरा प्रभाव डाला। फिर शुरू हुई भगत सिंह के विचारों को पढ़ने की यात्रा। उन समूहों में आना-जाना बढ़ा, जो खुद को भगत सिंह का अनुयायी बताते हैं। पहला समूह दावा कर रहा था कि वह भगत सिंह के विचारों पर चल रहा है, लेकिन मैंने क्या देखा? या तो वह वर्ग मार्क्सवाद का समर्थक था या दबी जुबान में माओवाद का हितैषी। मुझे वहां के आचार-विचार की अग्रिम पंक्ति में भगत सिंह नहीं दिखाई दिए। वहां बाबासाहब आंबेडकर भी उसी तरह पीछे खड़े दिखे, जैसे भगत सिंह दिख रहे थे। क्या वाकई में यह वर्ग रेलवे या एलआईसी के बिक जाने की आशंका में देश को बर्बाद होते देख रहा है? क्या वाकई में इस वर्ग को उस वंचित आदमी की चिंता है, जिसके बच्चों के बदन पर पूरे कपड़े भी नहीं हैं। या कुल मिलाकर, वहां के लोग अपनी-अपनी सरकारी नौकरी बचाने और निजी तरक्की की जुगत में हैं।

- जिस दूसरे समूह में भी मेरा आना-जाना था, उसके मन में भगत सिंह की छवि रोमांटिक क्रांतिकारी की है। रंग दे बसंती चोला वाली। असेंबली में बम फेंककर हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ जाने वाली... और बीच-बीच में महात्मा गांधी को चार ताने मार देने वाली। यह समूह छत्रपति शिवाजी और वीर सावरकर से लेकर गुरु गोलवलकर तक का दीवाना है। इस वर्ग के विचारों में भगत सिंह तो नहीं दिखे, लेकिन भावनाओं में कहीं-कहीं दिखाई पड़े। इन्हीं भावनाओं की आग पर वोटों की रोटियां भी सिकीं। लेकिन तब भी वे लोग रात को भूखे ही सोए, जिनकी भगत सिंह को सबसे ज्यादा चिंता थी।

- भगत सिंह ने लिखा था- किसी बात पर केवल इसलिए विश्वास न कर लेना कि उसे मैंने कहा है। पहले उसे समझना। फिर उस पर विचार करना। बाद में अपना निर्णय बनाना। भगत सिंह के इस कथन की गहरी छाप आज भी मन में है। उन्हें पढ़ते हुए यही दृष्टिकोण सामने रखता हूं।

:: और भगत सिंह क्या थे? : :

- भगत सिंह धर्म को नहीं मानते थे। लेकिन उन्होंने कभी किसी धर्म के अनुयायी की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाए। उनका तिरस्कार नहीं किया।

- भगत सिंह नास्तिक थे। अंतिम सांस तक वे अपने इस साहस पर कायम रहे। नास्तिकता उनके लिए ढोंग नहीं थी। नास्तिकता उनके लिए किसी धर्म विशेष को निशाना बनाने का छद्म हथियार नहीं था। उन्होंने विरोध किया तो हर धर्म का। मनुष्य का विरोध नहीं किया।

:: मैं और भगत सिंह ::

- मैं भगत सिंह की नास्तिकता को प्रणाम करता हूं। उनके जैसा अदम्य साहसी नास्तिक दूसरा नहीं। उनके जैसा देशभक्त दूसरा नहीं। उनके जैसा समाजवादी दूसरा नहीं। उनके जैसा इंसान दूसरा नहीं।..... लेकिन भगत सिंह जितना साहस मुझमें नहीं। बचपन से आज तक कई बार नींद में चुड़ैलों के सपने देखे हैं। आज भी जब चुड़ैल सपने में आ जाए तो भगत सिंह नहीं, हनुमान जी याद आते हैं।

-अंत में यह मानता हूं कि भगत सिंह भावनाओं में भी रहें और विचारों में भी। दोनों में से सिर्फ एक में रहना किसी के हित में नहीं। भगत सिंह नाम की छत के नीचे एकसाथ सभी खड़े होकर तो देखें। अच्छा लगेगा।

- चलते चलते मेरी ही कविता का अंश...

यह देश उनका था
जो इसके लिए शहीद हो गए
यह देश उनका है
जो इसके लिए शहीद होंगे

आज शहीद भगत सिंह की जयंती है
आज मेरे सबसे बड़े हीरो की जयंती है
आज 28 सितंबर है...

नमन, जय हिंद!

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